Thursday, 26 February 2015

ज़िन्दगी आग हैं पानी डालते रहिये...

ज़िन्दगी आग हैं पानी डालते रहिये
हर मोड़ पर दिल का सिक्का उछालते रहिये

दिखने लगी हैं नमी,हसींन आँखों में
अल्लाह उसका काजल सँभालते रहिये

  धड़कने बेजान हैं बेचैन रातो को
हर सुबह मुर्दो में जान डालते रहिये

टूट कर वो बाहों में पिघल जायेगा
दिल में ये ख्वाब पालते रहिये

 कुछ दिनों में हम जिद छोड़ ही देगे
 आप बस बात टालते रहिये

चाँद की जुर्रत नही की टिक पाये
 चांदिनी रात में धीरे धीरे घूँघट निकालते रहिये

एक रोज़ मैं लौटूंगा सगुन का सिक्का लेके
आप हाथो की मेहँदी संभालते रहिये

तुम्हारे ख्वाबो की ईमारत बहुत बुलंद हैं
तेज़ धुप में अभी पत्थर निकलते रहिये






2 comments:

  1. जि़ंदगी आग है, पानी डालते रहिए। जनाब आपकी हर गज़ल विल पावर बढ़ाने में सहायक है। आपको शायद आभास भी नहीं होगा कि आप हम सबको कितना हैसला दे रहे हैं।

    ReplyDelete
  2. हर शेर नए अंदाज़ का ... बहहुत ही लाजवाब ...

    ReplyDelete