Sunday, 12 August 2018

मगर तुम्हारे दिल मे क्या हैं मुझको बता दो



अब चाहे जहर दो या दवा दो,
मगर तुम्हारे दिल मे क्या हैं मुझको बता दो


ख़ाक हो जाए परवाने उनकी किस्मत हैं
आज नकाब अपने चेहरे से हटा दो

खामोशियो और चुप्पियों को तालों में बंद करो
हर सितम के ख़िलाफ़ आवाज उठा दो

आज की रात आगोश में हम तुम पिघल  जाए
सारी शर्म और बहानो को आग लगा दो

खुद ही आ जाओ मेरी बाहो में
और फिर शर्मा के ऑंख झुका दो

चिंगारिया कभी सैलाब  भी उगल सकती हैं
बेखौफ हवाओ को औकात बता दो

खुद ही गिरो दो किताबे,सर टकरा दो
फिर घबरा के दाँतो तले अंगुलियों दबा दो

मत उलझो सही गलत की गहरी तकरीरों में,
बाली उमर हैं बस आँख चुरा लो,

बहुत से हादसे सड़क किनारे भी हो जाते हैं,
जितना बचा सकते हो जफ़र खुदको बचा लो