Wednesday, 26 January 2022









ख्वाहिश होनी चाहियें मुलाकात कोई दस्तूर नही,

बात भी ना करें ईतने भी तो हम दूर नही,


और लोग है जो जन्नत के छलावे में जिंदा है,
मेरी ख़ुदी को  आज भी ये मंज़ूर नही,

बेकशी के घर मे मुफ़लिसी का साया है,
परेशा जरूर हूँ मगर मजबूर नही,

कभी बात करो तो कुछ समझ आऊं,
थोड़ा मुश्किल हूँ  लेकिन मगरूर नही,

समझे नही तो मत पढ़ो मुझे  महफ़िल में,
मुनासिब होना चाहता हूँ मैं मशहूर नही,

Thursday, 30 December 2021

लिख़ने को बस तेरा एक नाम बाक़ी है..






आग सब बुझ गयी बस राख बाक़ी है

तुम कैसे कहते हो रगो में इंक़लाब बाकी है


कोई कत्ल कोई जेल गया कोई डर के भाग गया

कौन अब शहर में इनके ख़िलाफ़ बाकी है,


जुल्म ने तो कबके इंतेहा कर ली है

बस अब  इसका हिसाब बाकी है


कभी अचानक गर मिले तो मुँह फेर लेना,

किसको क्यों जताना कि दिल कितना बेकरार बाकी है,


ख्वाब तो सब मोबाइल में देर तक देख लिये,

इस रात की आगोश में बस आँखों को आराम बाकी है,


फ़ूल कलियाँ खुशबू सब चमन में सज चुकी,

लिख़ने को बस तेरा एक नाम बाक़ी है,


तेरे मेरे बीच जो बहुत था अब थोड़ा भी नही,

खुदको छुपाने के बस मयार बाक़ी है,