मिलेंगे अब तो सिर्फ़ दुश्मन की तरह
तुम भुला दो मुझे बचपन की तरह
तुम्हें होना है तो ग़ैर का होके रहो
निभा लूंगा हर बात “वचन”की तरह,
इस एक जुदाई ने कितना मजबूर कर दिया
लिपट गया वी मुझसे कफ़न की तरह,
मैं देखता रह गया पुराने आँगन की तरह
और तू जुदा हो गयी दुल्हन की तरह,
मुश्किलों मैं उस पिता ने तुम्हें जवान किया
तुम फ़र्ज़ निभा देते हो श्राद्ध और हवन की तरह
ग़ैर तो कृष्ण बनके भी बचा लिया करते है
अपने ही चीर हरते है दुर्योधन की तरह
