Wednesday, 18 February 2026

तुम भुला दो मुझे बचपन की तरह

 


मिलेंगे अब तो सिर्फ़ दुश्मन की तरह

तुम भुला दो मुझे बचपन की तरह


तुम्हें होना है तो ग़ैर का होके रहो

निभा लूंगा हर बात “वचन”की तरह,


इस एक जुदाई ने कितना मजबूर कर दिया

लिपट गया वी मुझसे कफ़न की तरह,


मैं देखता रह गया पुराने आँगन की तरह

और तू जुदा हो गयी दुल्हन की तरह,


मुश्किलों मैं उस पिता ने तुम्हें जवान किया 

तुम फ़र्ज़ निभा देते हो श्राद्ध और हवन की तरह 


ग़ैर तो कृष्ण बनके भी बचा लिया करते है

अपने ही चीर हरते है दुर्योधन की तरह




Friday, 9 January 2026

"गोपाल"बनके ये महाभारत देखता हूँ..

 




सुबह शाम  रिश्तो की तिज़ारत देखता हूँ
"गोपाल"बनके ये महाभारत देखता 
हूँ


सच बरसो बरस एक सुनवाई को तरशता हैं
झूठ की चंद घंटों की जमानत देखता हूं


अपनी मुफ़्लिशि से जब मायूश हो जाता हूँ
शहर में तेरी  बुलंद इमारत देखता हूँ


अपने गम और दर्द बेमानी लगता हैं
जब दूसरे बंदों की शहादत देखता हूँ


सैकड़ो चिराग खुदही शर्म से बुझ जाते हैं
कुछ  अंधेरो की हिमायत देखता हूँ


हज़ार इंकलाब मुझी में मशाल उठाते हैं
जब मैं गांधी के उसूलो की ताकत देखता


बहुत दर्द मुझे पंछियो पेड़ो का महसूस हुआ
बस्ती बस्ती में फ़क़द आदमी की बसावट देखता हूँ