घनघोर अंधेरे में रोशनी का दीदार सा हैं
आज फिर हमें तुम्हारे फ़ोन का इंतज़ार सा हैं.
दो पल के रिश्ते में तुम सकुने उम्र दे गये
मेरे वजूद पर तेरी सोहबत का उधार सा हैं..
लाते ला ते तूफान हमे ये किधर ले आया हैं
पास मेरे तुम दूर चल दिये जबके काफिला मझधार सा हैं
रोज़ी रोटी के फेरो ने हमदर्दी को मार दिया
पल दो पल का मिलना तो बस रिश्तो का व्यपार सा हैं..
माना मैंने की तुम काँटो पर चलते हो,
आकर देखो रस्ता मेरा भी तलवार की धार सा हैं...