Thursday, 2 July 2026

उस उम्र में वक़्त की रफ़्तार का पता ही नहीं चला







ज़िन्दगी के चड़ाव के उतार का पता ही नहीं चला 

उस उम्र में वक़्त की रफ़्तार का पता ही नहीं चला 




ख़्वाब हमने भी सजाए थे दुनिया ए मोहब्बत के

हमे मजबूरी के पहाड़ का पता ही नहीं चला 


एक जुनून सा छाया रहा दौरे जवानी 

तेज धार में दरिया के मयार का पता ही नहीं चला


तसव्वुर में तेरा चेहरा रख  यू लिया 

कंकड़ पत्थर और खार का पता ही नहीं चला

4 comments:

  1.  आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में रविवार 05 जुलाई, 2026 को लिंक की जाएगी ....  http://halchalwith5links.blogspot.in  पर आप भी आइएगा ... धन्यवाद!

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