कच्ची-पक्की बातों में सच्चा हो जाऊं
दिल करता है कि मैं फिर से बच्चा हो जाऊं
क्यों रहे फिर दुनियादारी का चक्कर
जो बोलू मुँह से वही मेरा मतलब हो जाऊ
जिसको छोड़ा पीछे वही अब पूरा लगता है
क्यो ना लौटकर गाँव का सादा लड़का हो जाऊ
बेझिझक वक़्त बिताये फिर साथ मे हम तुम
लम्हा-लम्हा करके फिर मैं अरसा हो जाऊं,
साथ सुरो से सजा है जीवन तुम्हरे आने से
जुल्फ सजाओ फूलो से तुम,मै भवरा हो जाऊं,
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