Sunday, 26 August 2018

तेरी तू में,मेरी मै में,हम दोनों बर्बाद  हुए...!!!





सात फेरों के सारे वादे,खुदगर्ज़ी में ख़ाक हुए
तेरी तू में,मेरी मै में,हम दोनों बर्बाद  हुए


कुछ बातों का सुलझना जैसे अब नामुमकिन हैं
जन्नत का सा वज़ूद था पर कश्मीर से हालात हुए,

सौ मसलो का हल बस एक हल्की सी गर्मी हैं
तुमने यू जब गले लगाया कितने पंछी आज़ाद हुए,

बारिश बादल फूल बहारे, ये तो सब दिखावा हैं,
चंद शाखों ऐसी भी हैं जो सावन में आषाढ़ हुए,

एक भी  चिराग तन्हा गर तुफानो से टकराता हैं
मुझको कोई फर्क नही,कितने दरिया पार हुए,

किन हालातो से निकलकर हमने अलख पायी हैं
शमशानों से आग चुराकर,अंधेरो से दो चार हुए,

तमाम सूरज ,चंद अंधेरो से  जब हार गए
मेरे शहर में कितने दंगे फसाद हए,

किलकरियो को जब चिंगारियों ने दबा दिया,
बच्चों के खेल खिलोने दुनिया के ज़िहाद हुए

मेरी ही वतन परस्ती ने तुझे हिन्दोस्तां बनाया
तेरी दीवानगी में कितने 'पहलू' कितने 'अख़लाक़'हुए...!!!


Saturday, 25 August 2018

ये मौसम क्यों नही बदल जाता ...!!!





ये धूप क्यों नहीं छट्ती ,

कोई बदरी क्यों नहीं उमड़ती .
कोई सावन क्यों नही बुलाता ,
ये मौसम क्यों नही बदल जाता ...

भारी हैं बहुत मुशकिल समय ,
उदास तू परेशां मैं .
बेचैनी सी दिल पे छायी,
बातो बातो में,आख छलछलायी .
यादो के साये मंडराते ,
बेबसी मे हमको डुबाते.
ये जो हैं वो काश नही होता ,
ना तू परेशा,न मैं रोता .
एक दुसरे में हम खो जाते ,
वो शुरुवाती लम्हे क्यों नही लौट आते ...

जागी जागी फिर राते फ़ोन पकडती ,
ना आख लगती ना जुबा थकती .
दूर से ही सही कोई साथ होता ,
रगों मैं खुशनुमा एहसास होता .
डरी -डरी अंगुलिया हिम्मत जुटाती ,
जुबा कहते कहते लड़खड़ाती .
गर्म साँसे फिर भारी हो जाती .
हाय फिर कोई दामन बचाता,
ये मौसम क्यों नही बदल जाता .......