Sunday, 3 November 2019

मेरी इस प्यास की कही तो ताब होगीं....









मेरी इस प्यास की कही तो ताब होगीं,
एक चिंगारी की कही आग होगीं,


मेरी हर बूँद में,इश्क़ का समुन्दर हैं,
प्यासा रख कर,तू भी कहाँ आबाद होगीं,

मत करो फ़ोन बारहां नंबर बदल-बदल के,
हमको-तुमको तकलीफें बेहिसाब होगीं,

खामोश देखता हूँ मैं तेरी बदगुमानिया,
कभी तो हद से पार मेरी बर्दास्त होगीं,

मेरे सच को तुम यू ज़िंदा दफना नही सकते,
एक रोज़ कब्रे खोद,फिर शिनाख्त होगीं,

उसे हो,तो हो के रहे घमंड अपनी दौलत पे,
ख़ाक से बनी थी दुनिया,रिस के फिर ख़ाक होगीं,

ग़लतफ़हमी का मट्ठा इतना जड़ो ने पी लिया,
अब नही लगता कि बस्तियां फिर शाद होगीं...

Wednesday, 2 October 2019

सच लिख़ने की इस दौर में क़लम को ताक़त ना हुयीं...







दर्द में डूब के भी ख़िलाफ़त ना हुयी,
ना हुयीं हमें तुमसे शिकायत ना हुयीं..


रब्त उसके ने हज़ार बंदिशो पे मज़बूर किया
इतनी शर्तों पे हमसे मोहब्बत ना हुयीं,

हज़ार फ़ोन करो,लाख़ इल्तेज़ा, कऱोड नख़रे,
गोया कभी इतनी मेरी जान को आफ़त ना हुयीं,

देश परदेश में,तेरी उम्मीद पर मैं टिका रहा,
एक मासूम दिल की तुझसे हिफ़ाज़द ना हुयी,

नादान बेक़सूर टूट कर बर्बाद हुआ जाता हैं,
और क्या बाकी हैं ख़ुदा क्या अभी क़यामत ना हुयी,

घोसलें उजाड़ के जब गौरैया भी उड़ गयीं,
लाख कोशिश से भी गांव के घर मे बसावत ना हुयीं,

ईमाँ अपना बेंच के दुकाँ अपनी चलाते हैं,
सच लिख़ने की इस दौर में क़लम को ताक़त ना हुयीं....!!!