बस के ये एक दर्द दिलपे दुशवार सा हैं कोई
मेरे ही हालात ए हाल से बेज़ार सा हैं कोई
मेरे ही हालात ए हाल से बेज़ार सा हैं कोई
अपना सा लगता हैं कोई जब चोट खाता है
पोसीदा सी वजहों में मेरा किरदार सा हैं कोई,
रोज रोज की तकरारो में रब्त रिस जायेंगे,
सर्द रातों में खाँसता हुआ बीमार सा है कोई
सारे दर्द सारे शिकवों से मैं जुदा हुआँ
बस एक तीर जिगर के पार सा हैं कोई
तेरा status तेरी dp देखता रहता हूँ,
नये शहर में पुराना तलबगार सा है कोई,
नये शहर में पुराना तलबगार सा है कोई,

