Sunday, 13 September 2020

दुश्मन अभी रात के भुलावे में हैं...








दुश्मन अभी रात के भुलावे में है,
ये सूरज अभी बादलों के साये में हैं,

ग्रहण की रोशनी तुम्हे अन्धा बना देगी,
ज़िन्दगी का जोड़ अभी घटाये में हैं,

ये तहज़ीब हैं जिसे कमज़ोरी समझते हो,
मेरा ज़मीर मेरे सब्र के संभाले में हैं,

मंत्री जी और साहब जोड़ तोड़ करते रहे,
कितनी देर और सुबह के उजाले में हैं,




Sunday, 6 September 2020

बस एक तीर जिगर के पार सा हैं कोई...







बस के ये एक दर्द दिलपे दुशवार सा हैं कोई
मेरे ही हालात ए हाल से बेज़ार  सा हैं कोई



अपना सा लगता हैं कोई  जब चोट खाता है
पोसीदा सी वजहों में मेरा किरदार सा हैं कोई,

रोज रोज की तकरारो में रब्त रिस जायेंगे,
सर्द रातों में खाँसता हुआ बीमार सा है कोई

सारे दर्द सारे शिकवों से मैं जुदा हुआँ
बस एक तीर जिगर के पार सा हैं कोई

तेरा status तेरी dp देखता रहता हूँ,
नये शहर में पुराना तलबगार सा है कोई,