Monday, 30 July 2018

तड़फते हैं,भटकते हैं,रोते हैं पीते हैं,

 











तड़फते हैं,भटकते हैं ,रोते हैं पीते हैं,
हम तो इसी तरह से जीते हैं...



कोई बात तेरी सी कभी याद आती हैं
एक नमी सी आँखों में उतर जाती हैं
नीची नज़रो से हंस देते हैं
किसी तरह कलेजा ताक पर रख देते हैं
कभी कभी तेरी तश्वीर भी तक लेते हैं
खुद ही कुरेदते हैं जख्म,खुद ही सीते हैं
हम तो इसी तरह से जीते हैं...


वही जहाँ हम तुम कभी आते जाते थे,
हमसे मिलने को तुम जब गिड़गिड़ाते थे
तुम्हारे आंसू हमारी खुशियो में जहाँ गिरे थे
पहली बार जिधर हम मिले थे,
उसी जगह कभी चले जाते हैं
अपना वक़्त हम इसी तरीखे बिताते हैं

तुम्हारे सिवा यू तो अब कोई कमी नही
हारकर तुमसे अपना सबकुछ,
देखो कितनी लड़ाईयां जीते हैं
हम तो इसी तरह से जीते हैं.....

Sunday, 20 May 2018

पगली लड़की हैं बारिशो मे भीग लौट आयेगी,

जो निकली हैं जुस्तजू किधर जाएगी
पगली लड़की हैं बारिशो मे भीग लौट आयेगी,


जो दुनिया हैं बाहर तुम्हारे ख्वाबो के इतर
हर मोड़ पर तुम्हे गिराएगी रुलायेगी,

चाँद आँखों से उतरकर यादोँ में गुम हो जायेगा
वक़्त के साथ शैतानियां सलीको में बंध जायेगी,

तकदीर छोड़ आया हूँ पीछे बस हुनर पर यकीन हैं,
इस दौर में कोई सबरी हमे क्यो बेर खिलाएगी,

एक वो भी मंजर आयेगा दौरान ए सफ़र ,
थकान खुद बगावत को  लिए उकसायेगी,

कितनी कमज़ोर निकली अमन चैन की बुनियादें,
हमे यकी नही था ये भीड़ उसे गिरा पाएगी,

बता तो दु तुमको किस्सा ए बर्बादी ए ज़फर
जो सुन सको तुम,जब आँख मेरी भर आएगी।