Sunday, 1 February 2015

बदनसीब आँखों ने दुनिया बेइंतेहा देखी..

हसी पनाह देखी दर्द भरी आह देखी
बदनसीब आँखों ने दुनिया बेइंतेहा देखी..

रातभर अपने अपने हिस्से के बिस्तर में सिमटते रहे
देखने वालो ने हमारी दुरिया कहा देखी.

फकद मुर्दो की भीड़ में कैद हैं ज़िन्दगी
आज के इंसा ने आदमियत कहा देखी.

तेरे मेरे दरमियान फासले लाज़मी थे
तूने अपनी ज़रूरते देखी हमने तेरी जुबा देखी

बड़े सलीके से उसने दुनियादारी पहन ली
वही सूरत हमने तो हर जगह देखी

हुस्न लैला ने मजनू को किया बदनाम
इश्क़ मीरा जिसने जहर मैं भी दवा देखी

Wednesday, 28 January 2015

दर बदर भटकता रहा जिसकी तलाश में.....

दर बदर भटकता रहा जिसकी तलाश में
 पाया है वही सुकून तुम्हारे पास मे

तेरी तिशनगी को मोहब्बत समझता रहा
कच्चा हु आज भी दुनिया के हिसाब मे

बहुत मगरूर हो चला हैं मेरी मज़बूरियों में  ,
देखता हूँ तुम्हारा कल मैं अपने आज में 

तमाम तडफ तमाम मुश्किलें बेमानी मालूम पड़ी ,
कल रात जो तुम मिले पुराने ख्वाब में 

इस एक एहसास से सारे कयास बदल दिए
कल के खुदा बिक गये जफ़र पहली नमाज़ में.......