Monday, 4 May 2015

हालात से हारकर उम्मीद फिर रोने को हैं.....

राह विरान,दिल परेशान,पलके भिगोने को हैं,
हालात से हारकर उम्मीद फिर रोने को हैं.


रास्ते सख्त हैं,मुश्किल बड़ा वक़्त हैं,
ज़िन्दगी पाव खीच कर कफ़न बिछौने को हैं.

टूटती सांस,बेचैन धड़कने खामोश,
ताकते पस्त, हौसले भी कोने को हैं.

एक ही तशवीर में, क्या क्या दिखा दिया
रौशनी से भागकर आँख बस सोने को हैं.

कहा जाऊ किससे मिलू किससे बात करुँ,
ज़िन्दगी एक सी बोझ शामो सहर ढोने को हैं

तेरी सिसकियो में मैंने सब पढ़  लिया
बात जो ना सुनी जो ना किसीसे कहने को हैं

सारे अरमान किताबो मैं दबके मर गए,
हमभी अपना वज़ूद पन्नों में कही खोने को हैं....

Thursday, 9 April 2015

युही किसी शाम मैं ढल जायूँगा,

युही किसी शाम मैं ढल जायूँगा,
तेरी दुनिया से बहुत दूर निकल जायूँगा.


जो भी जी चाहे फिर जीभर के करना
अपने पीछे मैं तेरा नशीब बदल जायूँगा

चंद रोज़ करेगे ये लोग  रोना धोना,
धीरे धीरे मैं कब्र की मिटटी मे गल जायूँगा

तेरी हमदर्दी की खैरात मुझे मंज़ूर नही
अपने हालात से मैं खुद ही संभल जायूँगा

 यकींन का फरिश्ता,उम्मीद का सूरज हूँ
किसी आँख मे रात भर पल जायूँगा

आज की रात हैं क़यामत,फैसला करले,
मलाल तमाम उम्र का कल सुबह मल जायूँगा