Wednesday, 28 January 2015

दर बदर भटकता रहा जिसकी तलाश में.....

दर बदर भटकता रहा जिसकी तलाश में
 पाया है वही सुकून तुम्हारे पास मे

तेरी तिशनगी को मोहब्बत समझता रहा
कच्चा हु आज भी दुनिया के हिसाब मे

बहुत मगरूर हो चला हैं मेरी मज़बूरियों में  ,
देखता हूँ तुम्हारा कल मैं अपने आज में 

तमाम तडफ तमाम मुश्किलें बेमानी मालूम पड़ी ,
कल रात जो तुम मिले पुराने ख्वाब में 

इस एक एहसास से सारे कयास बदल दिए
कल के खुदा बिक गये जफ़र पहली नमाज़ में.......

Monday, 29 December 2014

तुम्हारे दिल मैं कसक वही हैं इधर भी वही इरादा मेरा....

तुम्हारे दिल मैं कसक वही हैं इधर भी वही इरादा मेरा
तेरी आँखे मचल रही हैं बेक़रार मन नादां मेरा

मिले थे जबसे नयन तुमसे दिल हैं जोगी बावरा सा
ये कसक मेरी हई न पूरी हैं जुनून आधा मेरा

होंगे बहुत सारे प्रेमी तुम्हारे मुझसे बेहतर मुझसे अच्छे
सच कहूँगा जान तुमसे एक फूल सा दिल सादा मेरा

एक हैं मंदिर एक ही मूरत और कोई ना हमको जचता
तू ही शिव हैं तू ही सूंदर तू ही मोहन राधा मेरा