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Saturday, 19 May 2018

पगली लड़की हैं बारिशो मे भीग कर घर आयेगी

जो निकली हैं जुस्तजू किधर जाएगी
पगली लड़की हैं बारिशो मे भीग लौट आयेगी
जो दुनिया हैं बाहर तुम्हारे ख्वाबो के इतर
हर मोड़ पर तुम्हे गिराएगी रुलायेगी
चाँद आँखों से उतरकर यादोँ में गुम हो जायेगा
धीरे धीरे शैतानियां सलीको में बंध जायेगी

तकदीर छोड़ आया हूँ घर के हुनर पर यकीन हैं,
इस दौर में कोई सबरी हमे क्यो बेर खिलाएगी
एक वो भी दौर आयेगा दौरान ए सफ़र ,
हिम्मते बगावत को उकसायेगी बहकायेगी,
कितनी कमज़ोर निकली अमन चैन की बुनियादें,
हमे यकी नही था ये सरकार उसे तोड़ पाएगी
बता तो दु तुमको किस्सा ए बर्बादी ए ज़फर
जो सुन सको तुम,जब आँख मेरी भर आएगी।

Saturday, 12 May 2018

मेरे सीने में तेरी भी धड़कने पूरी हैं,

मेरे सीने में तेरी भी धड़कने पूरी हैं,
बेशुमार इश्क़ हैं जब तो ये दूरिया दस्तूरी हैं,
जो खुशबो तेरे सांसो में पलती हैं
मेरे भी आहो में महकती वही कस्तूरी हैं
जबसे तुमसे मिलकर जुदा हुआ हूं
बेजान सा हूं मैं तू भी तो अधूरी हैं
जबके हमारे दरमियां बस प्यार ही प्यार हैं
तो क्या हर बात पे लड़ना जरूरी हैं
सात फेरों की सात कसम खायी हैं
मैं तेरा ही माझी हूँ, तू मेरी जीवन की धुरी हैं..