Sunday, 14 July 2019

आँसू






चूड़ी काज़ल कंगन और ऑंसू,
बारिश कोहरा बादल और आँसू

पीपल पतझड़ जेठ दुपहरी,
झूले साथी सावन और आँसू,

मेरी पीड़ा मेरा दुखड़ा बोझ भयंकर,
मिश्री बातें तेरी जियरा सदल और आँसू

लकड़ी गठ्ठर,रोटी लून सक्कर
गैय्या ग्वाले,बन्सी जंगल और आँसू

फावड़ा कुटला ,खेत का टुकड़ा,
मुठठी फ़सलें,भतेर दंगल और आँसू,

गांव पनघट हल्ला बचपन
परदेश तन्हा कमरा बंजर और आँसू

दरिया पर्वत भूख़ बेकारी लाचारी
आक्षित आखर ऐपण चंदन और आंसू

Wednesday, 10 July 2019

मैं आज भी ऐसे तेरा वचन निभाता हूँ....







चिता की अग्नि में हर शाम मौन लेट जाता हूँ
मैं आज भी ऐसे तेरा वचन निभाता हूँ,

थक जाते हैं सब पुतले दिनभर की भेड़चल से,
में जागकर अपना फर्ज निभाता हूँ,

कोई सूरज अपने ताक़त में जब मग़रूर दिखा,
बहुत सादगी मैं उसको दिया दिखता हूँ

जमाने भर की जिलालत से तो लड़ भी लेता हूँ,
घर आकर तुम्हारे मसलों से हार जाता हूँ,

दुसरो की गलतियों में बहुत चीख़ता चिल्लाता हूँ,
अपनी गुस्ताखियों बड़े सऊर से पर्दे लगाता हूँ,

शौक से तुम जॉगिंग पर टहलने जाते हो,
एक ध्याड़ी मज़दूरी पर दिनभर पसीना बहाता हूँ,

तुम पत्थरो की बस्तियां बसाते हो,
मैं गाँव की काली मिट्टी से सोना उगाता हूँ