Thursday, 21 September 2017

किसी दिन अपने दिल की बात बता दू तो अच्छा हो

किसी दिन अपने दिल की बात बता दू तो अच्छा हो
फासले सारे एक साथ मिटा दू तो अच्छा हो

कितने सऊर से तुम हमसे चालाकी दिखाते हो
चंद रोज और ये राज दबा दू तो अच्छा हो
ये मुसीबते जो मुझे बर्बाद भी कर सकती हैं
गर इस तपिस में खुदको फौलाद बना लू तो अच्छा हो
जो जज़्बात तकलीफ के शिवा कुछ नही दे सकते
पुराने खातों को अब आग लगा दू तो अच्छा हो

Wednesday, 20 September 2017

तुमसे बिछड़कर परेशा किस कदर हैं ज़िन्दगी,

तुमसे बिछड़कर परेशा किस कदर हैं ज़िन्दगी,
एक सेज़ सी थी कभी,अब दरबदर हैं ज़िन्दगी

किशी आँख में ख्वाब सी जो सोती थी
हर सुकून से वो बेअसर हैं ज़िन्दगी
कुछ एक साये तो ज़िंदा मैन भी देखे हैं
तुमने देखी हैं मगर किसके घर हैं ज़िन्दगी
अपनी कमजर्फी से अब सिख रहे हो
मैन पहले कहा था एक सफर हैं ज़िन्दगी
वक़्त युही गुज़रता हैं जैसे गुज़र गया
फकत मुट्ठी भर ही तो हैं ज़िन्दगी
बुलंदियों की चाहत तुम्हे आसमानो की खव्हिश
मगर जिसके पाव में जमीन हैं उसीके सर हैं ज़िन्दगी