Sunday, 9 December 2018

मेरी हसरतो को कुचलकर शहनाईयां बजाना..







चाँद दिखाये मीरा तुम ज़हर पिलाना,
मेरी हसरतो को कुचलकर शहनाईयां बजाना..


अपने अंजाम में कुछ रोमानियत तो हो,
हल्दी के हाथ से सज धज तुम मेरा गला दबाना,

तुम तब भी मजबूर थी,अब भी मजबूरिया रही होगी
मतलब निकल जाये तो तुम फ़ोन भी मत उठाना,

मैं चुप चट्टान बनके समुन्दर के थपेड़े झेल लूंगा,
लोगो को जा जा के तुम अपने अश्क दिखाना,

चाहे अपने रिश्ते में कितनी गाँठे बँधी रही,
बहुत ईमानदारी से मग़र बेवफ़ाई निभाना,

रंग बदलकर क्या खूब जुबान बदली हैं,
क़यामत हैं उसका यूँ खुदको बेकसूर बताना,

आजकी शाम साक़ी ने कसम खिलाई हैं,
पीयू न पीयू मगरचे जरूरी हैं जाम में आंसू मिलना,

टूट भी जाऊ चाहे बर्बाद इस राश्ते पर होउ,
कुफ्र हैं जफ़र उसको कभी ग़लत बताना,

Thursday, 6 December 2018

शाम से दिल में सुलग रहा कोई....!!!






शाम से दिल में सुलग रहा कोई,
बुझती हुई लकड़ियों में पक रहा कोई,


हज़ार बार उम्मीद दम तोड़ती रही हैं,
फिरभी दस्तक पर सज रहा कोई,

यू तो कबसे रोना शिश्कना छोड़ चुका हूं,
मेरे सब्र को बेसब्री से तक रहा कोई,

ग़ज़ब की बेचैनी और दूर तक हैं सन्नाटा,
और शर्मा के मेरी बाँहों में सिमट रहा कोई,

जबके खुदको तेरे मुताबिक़ बना लिया हैं,
अपनी बातो से ही पीछे हट रहा कोई,

कोई आरज़ू न कोई ख्वाहिश हैं बाकी,
फिर भी उम्मीद बनकर दिल में बस रहा कोई,