ज़िन्दगी के चड़ाव के उतार का पता ही नहीं चला
उस उम्र में वक़्त की रफ़्तार का पता ही नहीं चला
ख़्वाब हमने भी सजाए थे दुनिया ए मोहब्बत के
हमे मजबूरी के पहाड़ का पता ही नहीं चला
एक जुनून सा छाया रहा दौरे जवानी
तेज धार में दरिया के मयार का पता ही नहीं चला
तसव्वुर में तेरा चेहरा रख यू लिया
कंकड़ पत्थर और खार का पता ही नहीं चला
