Sunday, 24 February 2019

आईने तोड़ देने से शक्ले नही बदला करती






आईने तोड़ देने से शक्ले नही बदला करती
सिर फोड़ने से अकले नही बदला करती,


कई बार मैंने किसानों को सूली पे रखके देखा हैं
हमारे गांव की खुदगर्ज़ फसले नही बदला करती,

लाख बार हज़ार कोशिस से जाहिर हैं
वजह बदल देने से वसले नही बदला करती,

तेरे जाने के बाद अकेले ही उसी जग़ह वक़्त बिताता हूँ
सूद अता करने से ही असले नही बदला करती,

दगा देता हैं वो बहुत सजा सवार के मासूमियत से,
गर्म जोशी से मिलने मुलज़िम की दफ़्हे नही बदला करती,






Sunday, 10 February 2019

इतनी प्यास थी कि फिर हद से गुजरने में वक़्त लगा...






इश्क़ की गहराई में उतारने में वक़्त लगा,
टूट गया मगर बिखरने में वक़्त लगा...


तूने मेरे नसीब में डूबना लिख तो दिया,
बीच मझधार मगर पाँव धरने में वक़्त लगा,

जब उसने कई बार मुझे  झूठ पीला दिया
मेरे गले से सच को उतरने में वक़्त लगा,

तुम भी थे वक़्त भी शाम और मय भी,
इतनी प्यास थी कि फिर हद से गुजरने में वक़्त लगा,

किनारे पर ही जब तमाशे दुनिया के देख लिए
मुझे फिर दरिया में उतरने में वक़्त लगा,

ना जाने किस शक पे तुम घेर के मार दो,
मौका ए हालात में घर से निकलने में वक़्त लगा.....