Sunday, 20 May 2018

पगली लड़की हैं बारिशो मे भीग लौट आयेगी,

जो निकली हैं जुस्तजू किधर जाएगी
पगली लड़की हैं बारिशो मे भीग लौट आयेगी,


जो दुनिया हैं बाहर तुम्हारे ख्वाबो के इतर
हर मोड़ पर तुम्हे गिराएगी रुलायेगी,

चाँद आँखों से उतरकर यादोँ में गुम हो जायेगा
वक़्त के साथ शैतानियां सलीको में बंध जायेगी,

तकदीर छोड़ आया हूँ पीछे बस हुनर पर यकीन हैं,
इस दौर में कोई सबरी हमे क्यो बेर खिलाएगी,

एक वो भी मंजर आयेगा दौरान ए सफ़र ,
थकान खुद बगावत को  लिए उकसायेगी,

कितनी कमज़ोर निकली अमन चैन की बुनियादें,
हमे यकी नही था ये भीड़ उसे गिरा पाएगी,

बता तो दु तुमको किस्सा ए बर्बादी ए ज़फर
जो सुन सको तुम,जब आँख मेरी भर आएगी।