Wednesday, 14 May 2014

दिये है जख्म जिसने उमर भर के लिए,
दुआए करते है उसी सितमगर के लिए.

जिसको तुम हमारी कमज़ोरिया समझते हो
गाव के लोग याद करते है हमे उसी हुनर के लिए
हमारी राते सदियों से करवटो मई लिपटी है
तरसते है एक नीद एक बिस्तर के लिए
मेरे वजूद पे ही लाचारिया लिखी उसने
किसे मुलजिम करू अपने मुकद्दर के लिए
तुम्हारी नफरतो का बोझ दबा देता है
जब भी कदम उठता हू सुलह सहल के लिए
जानता हूँ मुसीबत बन गया है जफ़र
कुछ बोलने की ज़रूरत नही इस ज़हर के लिए



2 comments:

  1. Wah wah

    Tere nazm se kuch beeta waqt yaad aaya
    Gujra hooa woh zinda dil shaks bahut yaad aaya

    Jo na kuch se har kuch banane ka hunar rekhta tha
    Aaj kisi ke toote khwabo ko dekha toh bahut yaad aaya

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    1. gazb...janab.
      kis shakhs ko yaad kr rhe hai...

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