Friday, 13 March 2015

मेरी निगाह को तेरा इंतज़ार अब तक हैं …

धड़कनो में दबा  हुआ सा गुबार अब तक हैं,
मेरी निगाह को तेरा इंतज़ार अब तक हैं  . 

गैर की बाहो में भी तुम मुझे भुला नही सकते ,
सदाओं में कशिश को वो धार  अब तक हैं  

एक रोज़ छुआ था दौरे तनहाई में,
बदन में खुशबु ए यार अब तक हैं 

यु ही मिल जाएगी तू किसी रोज़ उसी रोड पर,
नादान दिल को ये एतबार अब तक हैं 

जीता हूँ दुनिया के कई इम्तहानों में ,
गोया उस हार से हार अब तक हैं  . 

मुझसे पहले जो चोट खाये बैठे थे,
उनको जफ़र बुतो से करार अब तक हैं  ……।